चित्र त्राटक करने की विधी और लाभ

चित्र साधना वशीकरण एवं सम्मोहन की सरल साधना है। किसी व्यक्ति को अपने अनुकूल करने अथवा घर से भाग गये बालकों, बालिकाओं को वापस बुलाने के लिये उपयोगी साधना है। पति-पत्नी पर वशीकरण करना, प्रेमी-प्रेमिका का वशीकरण करना, उच्च अधिकारियों का वशीकरण करना चित्र त्राटक साधना से सम्भव हो सकता है । 


चित्र त्राटक कैसे करे ? Chitra Tratak Kaise Kare ?
चित्र त्राटक कैसे करे ? Chitra Tratak Kaise Kare ? 


इस साधना का प्रयोग आवश्यकता पड़ने पर मैं प्रायः करता हूं और जरूरतमंद एवं परेशान लोगों से करवाता भी हूं ताकि वे अपनी अभीष्ट सिद्धि को प्राप्त कर सकें। सर्वप्रथम मैंने अपने भतीजे पर चित्र त्राटक किया था। यह 1960 की बात है। वह घर से कुछ रुपये लेकर भाग गया था । उसके साथ दो मित्र भी घर से भागे थे, किन्तु एक-दो दिन बनारस में रहने के बाद वे दोनों मित्र उसे छोड़कर बिना बताये घर वापस आ गये। भाभी-भइया बहुत परेशान थे, वे मेरे पास आये और कुछ तंत्र-मंत्र करने के लिये कहा। मैंने उनसे एक सप्ताह का समय लिया और कहा कि एक सप्ताह में वह वापस आ जायेगा अथवा मैं यह बता दूंगा कि वह कहां है। मैंने भतीजे के चित्र पर त्राटक शुरू किया तो दूसरे दिन ही उसके चित्र पर समुद्र का दृश्य दिखा। तीसरे दिन समुद्र के दृश्य के साथ गोलाकर सड़क और ऊंची-ऊंची इमारतें दिखीं। मैं समझ गया कि यह दृश्य मुम्बई के मैरिन ड्राइव का है, किन्तु इतना ही पर्याप्त नहीं था क्योंकि इतने बड़े मुम्बई शहर में चलते-फिरते व्यक्ति को खोजना कठिन था। मैंने प्रयास जारी रखा, पांचवें दिन मुझे चर्च गेट का स्टेशन दिखाई पड़ा, फिर एक पान की दुकान दिखाई पड़ी, पान की दुकान के सामने वह भतीजा दिखाई पड़ा । इतना भी पर्याप्त नहीं था, अतः छठे दिन मैंने फिर प्रयास किया तो पहले वाले चित्रों के बाद पान की दुकान का बोर्ड दिखाई पड़ा-बनारसी पान भण्डार, चर्च गेट, मुम्बई । 


इतना देखकर मैं हर्षित हुआ, फिर भी उसी दिन मैंने दूसरी आवृत्ति की, तब प्रारम्भ से अंत तक उपरोक्त दृश्य देखने के बाद एक नया दृश्य दिखाई पड़ा कि भतीजा पान की टोकरी लाकर पान की दुकान में बैठे हुये व्यक्ति को दे रहा है। मुझे संतोष तो हो गया किन्तु सातवें दिन फिर मैंने चित्र त्राटक किया और भावना की कि सम्पूर्ण दृश्य बारी-बारी से मुझे दिखें । उस दिन सिनेमा के दृश्यों की तरह सारे चित्र मुझे दिखाई पड़े और अंतिम दृश्य में एक नया दृश्य दिखाई पड़ा कि भतीजा स्वयं पान की दुकान में बैठा है और सामने खड़े ग्राहक को पान दे रहा है। बस, स्पष्ट हो गया कि घर से भागा भतीजा मुम्बई गया और पैसे समाप्त होने के बाद बनारसी पान भण्डार वाले के यहां नौकरी करने लगा है। उसने भी इलाहाबाद का बालक समझकर अपने पास रख लिया होगा मैने भाई साहब को फोन किया और सारी स्थिति से अवगत करा दिया। वे मुम्बई गये और मेरे बताये हुये सटीक पते पर पहुंच कर अपने बेटे को वापस लाये । चित्र त्राटक काफी सरल, उपयोगी एवं प्रभावशाली साधना है। इसे करना भी आसान है और इसका प्रतिफल पाना भी आसान है, किन्तु यह आध्यात्मिक चेतना को प्रस्फुटित करने वाली साधना नहीं है। यह साधना स्थायी प्रभाव रखने वाली भी नहीं है। जब तक साधक साधना करता रहेगा, तब तक इसका प्रभाव और प्रतिफल बना रहेगा।


साधना छोड़ने के दो-चार दिन बाद से इसका प्रभाव समाप्त हो जाता है । इस साधना को दिन में कई बार, कई आवृत्तियों में कर सकते हैं और एक बार में बीस से तीस मिनट तक बैठ सकते हैं। नये व्यक्ति को एक सप्ताह में ही नये-नये दृश्य दिखाई पड़ने लगेंगे और वह नई-नई अनुभूतियां करने लगेगा । इसके लिये नौ गुणा नौ आकार का पेपर लें, उस पर किसी देवी-देवता का श्वेत- श्याम (ब्लैक एण्ड व्हाईट) चित्र चिपका दें। चित्र कागज पर बीच में चिपकायें। चित्र त्राटक में रंगीन चित्र नहीं चिपकाना चाहिये । यदि देवी-देवता के चित्र न मिलें अथवा उन पर आस्था न हो तो किसी भी चित्र का उपयोग कर सकते हैं किन्तु सीनरी का उपयोग न करें, किसी एक चित्र का उपयोग करें। हीरो-हीरोइन, खिलाड़ी, नेता, महापुरुष के चित्र ले सकते हैं अथवा किसी फूल का चित्र अथवा किसी वस्तु का चित्र ले सकते हैं। अपना चित्र भी लगा सकते हैं। चित्र का आकार डेढ़ से दो इंच चौड़ा और तीन से साढ़े तीन इंच ऊंचा होना चाहिये, इससे कम या अधिक नहीं । चित्र के सामने एकाग्रचित्त होकर लगभग साढ़े तीन फीट की दूरी पर बैठें एवं 25 से 30 सैकण्ड तक उस चित्र को ध्यानपूर्वक अपलक दृष्टि से देखें और फिर आंखें बंद करके उस चित्र को कल्पना में देखने का प्रयास कीजिये। जब वह चित्र कल्पना में स्पष्ट हो जाये तो फिर आंखें खोलकर उसे उपरोक्त की तरह अर्थात् 25 से 30 सेकण्ड तक देखें। इसके पश्चात् फिर आंखें बंद करके कल्पना की दृष्टि से देखने का प्रयास कीजिये । इसी तरह एक दिन में कम से कम इक्कीस बार प्रयास करें।


प्रति दिन उस प्रकार अनवरत् अभ्यास करने से कुछ ही दिनों में ऐसी स्थिति बनेगी कि जब भी आप आंखें बंद करेंगे, आपको वह चित्र दिखाई पड़ेगा। जब आंखें बंद करने पर वह चित्र आपके अंतर्चक्षु के समक्ष लगभग एक मिनट तक स्थिर भाव में लगे तो समझ लें कि अब आपके मन की तीसरी आंख खुल गई है, आपका अंतर्चक्षु सक्रिय हो गया है। यहीं इस साधना की सफलता है। उस चित्र का अधिष्ठाता आपके अनुकूल हो गया। है। जब भी आप आंखें बंद करेंगे, तब आपको अद्भुत एवं मनोवांछित दृश्य दिखाई देंगे। इस प्रकार जब यह क्रिया अपनी चरम सीमा पर पहुच जायगी तो आप किसी व्यक्ति का भूत, भविष्य एव अदृश्य वस्तुओं को भी देखने में समर्थ हो जायेंगे। स्मरण शक्ति पहले दिन से ही बढ़ने लगती है।


आगे चलकर इस साधना के लिये समय का कोई प्रतिबंध नहीं है। दिन में किसी भी समय इसका अभ्यास किया जा सकता है। किसी दूरस्थ व्यक्ति को संदेश भेजने अथवा उससे संदेश प्राप्त करने अथवा उसे पास बुलाने के लिये चित्र त्राटक का सहारा लेना सर्वथा उचित होगा । इस साधना से आध्यात्मिक चेतना, शरीरिक-मानसिक दृढ़ता एवं सामाजिक सम्मान की वृद्धि नहीं होती, किन्तु यदि सदाचरण का पालन करते हुये साधक तुरीयावस्था में काफी देर तक बना रहे तो उसे प्राण ऊर्जा, चुम्बकीय शक्ति एवं आत्मिक बल प्राप्त हो जाता है।

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नोट:-  अगर आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारी  चित्र त्राटक कैसे करे ? Chitra Tratak Kaise Kare ?  पसंद आये तो Like करे और Share करने अपने Freinds, Relative को ताकी सबको इसका लाभ मिल सके , ये जानकारी Tratak Sadhna Siddhi के किताब से लिया गया है ,जिसके लेखक रमेश चंद्र श्रीवास्तव जी है , हमारे द्वारा बताई गई साधना को गुरू के सानिध्य में करना उचित होगा। जिससे आपकी साधना में कोई विघ्न नहीं आयेगा।और आपके गुरू आपके शरीर की रक्षा भी करेंगे। 


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